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जून, २०२५ पासूनच्या पोेस्ट दाखवत आहे

📜 शिवचरित्र पर्व 3: औरंगज़ेब के अत्याचारों से व्यथित एक योद्धा — छत्रसाल का शिवपथ

  सभा में सन्नाटा था। निनाद बेडेकर जी बोल रहे थे — लेकिन उनके शब्द इतिहास नहीं, बल्कि तिल-तिल जलती हुई एक पीड़ा थी .  उन्होंने कहना शुरू किया — "औरंगज़ेब से पहले भी एक परंपरा चल रही थी — मुंडक्यांचे मिनार की। यानी इंसानों के कटे हुए सिरों के स्तंभ। लड़ाई के बाद जब सिर काटे जाते, तो उनसे मीनार बनाई जाती थी। औरंगज़ेब दरबार में पूछता था - ‘मुंडक्यांचा मिनार झाला का?’ यानी  क्या सिरों का मीनार बनाया गया या नहीं?” यह कल्पना नहीं थी। ऐसे चित्र और दस्तावेज़ आज भी मौजूद हैं जो इन नरसंहारों की गवाही देते हैं। इन अत्याचारों का उद्देश्य स्पष्ट था — डर फैलाना, धर्मांतरण थोपना, और हिंदू मन को कुचल देना। फिर बेडेकर जी ने एक और अमानवीय घटना सुनाई — "एक व्यक्ति को पकड़कर उसके गुदद्वार में लोहे की सलाई डाली गई, फिर जब तक वह तड़पता रहा, उस पर वार होते रहे। वह जानवर की तरह चिल्लाता रहा। फिर उसकी आवाज़ बंद हो गई। जब सलाई निकाली गई — तो वह मर चुका था।" यह कोई कल्पना नहीं, बल्कि यूरोपीय यात्रियों द्वारा लिखित दस्तावेज़ों में दर्ज ऐतिहासिक सत्य है। 🔻 और यही अत्याचार देखकर एक वीर आत्मा का हृदय...

📜 शिवचरित्र पर्व   2:  "तेल में भीगा डगला, जली हुई हिंदू आत्माएँ — और शिवराय का संकल्प"

 एक सभागृह में गूंजती आवाज़ — निनाद बेडेकर जी बोल रहे थे। श्रोताओं की आँखों में उत्सुकता थी, लेकिन अगले ही क्षण वे शून्य में ताकने लगे। वो क्षण… जब Bedekar जी ने गोवा के उस भयावह अतीत का दरवाज़ा खोला — जिसके बारे में इतिहास की किताबें आज भी मौन हैं। "आपने The Goa Inquisition पढ़ी है?" "नहीं?" "तो आपको भारत में धर्म के नाम पर हुए सबसे भयानक अत्याचारों की जानकारी नहीं है…" "तेल में डुबोया गया डगला — इंसानी शरीर पर डाला गया — और फिर..." ...फिर आग की लपटों में तड़पता हुआ एक हिंदू, जो केवल इसलिए जलाया गया क्योंकि उसने प्रभु ईसा को स्वीकार नहीं किया था। यह कोई मिथक नहीं — यह उस काल का क्रूर इतिहास था, जहाँ गोवा पुर्तगालियों की बर्बरता का जीवित प्रयोगशाला बन चुका था। धर्मांतरण नहीं मानोगे? ➤ तो यातना मिलेगी। शरीर नहीं झुकेगा? ➤ तो उसे आग में जला देंगे। Ninad Bedekar जी की आँखों में आक्रोश की आभा थी, लेकिन शब्दों में संयम था। उन्होंने धीरे से कहा: "ये वही समय था जब दक्षिण में शिवाजी महाराज का उदय हो रहा था… लेकिन महाराज ने रोना या क्षोभ व्यक्त नही...

शिवचरित्र – पर्व 1 | "धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे..."

  "शिवचरित्र – निनाद बेडेकर जी के शब्दों में"  🔰 प्रस्तावना – भारत को शिवाजी महाराज को फिर से जानना होगा   छत्रपती शिवाजी महाराज  महाराष्ट्र में यह नाम केवल इतिहास नहीं, श्रद्धा का स्रोत है। हर घर में, हर मन में, उनकी गाथा जीवित है।  लेकिन कटु सत्य यह है कि आज भी भारत के बहुत बड़े भाग में शिवाजी महाराज को केवल "एक मराठा राजा" समझा जाता है। वो शिवाजी महाराज — जिन्होंने धर्म की रक्षा के लिए मुग़लों, आदिलशाही, निजाम और पोर्तुगीजों से अकेले लोहा लिया — जिनके कारण आज हम स्वतंत्र मंदिरों में पूजा कर पाते हैं, उन्हें केवल महाराष्ट्र तक सीमित कर देना, ये इतिहास से विश्वासघात है। यह श्रृंखला उसी अन्याय को तोड़ने का प्रयास है। यह केवल लेख नही - यह एक राष्ट्रीय संकल्प है। “हर भारतीय को शिवाजी महाराज को जानना चाहिए। क्योंकि वो केवल महाराष्ट्र के राजा नहीं थे — वो सम्पूर्ण भारत की आत्मा थे।” अब इस श्रृंखला के माध्यम से शिवराय की तेजस्वी गाथा हर राज्य, हर भाषा, हर पीढ़ी तक पहुँचेगी। 🗡 यह श्रृंखला प्रेरित है महान वक्ता निनाद बेडेकर जी के व्याख्यानों से.... 🧵 शिव...